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दुर्ग ब्लाक के डूमरडीह गांव की दो बहनों से इसे साबित कर दिया। परिवार के काम में माता-पिता का हाथ बंटाया। जितनी शिद्दत के साथ परिवार के काम में हाथ बंटाया उतनी ही शिद्दत के साथ अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास भी किया। एक बहन यूनिवर्सिटी में टापर बनी तो दूसरी ने नीट में सफलता हासिल की।दुर्ग जिले के डूमरडीह गांव में रहने वाले बैजनाथ चक्रधारी ईंट बनाने का काम करते हैं। परिवार में पत्नी कुसुम, तीन बेटियां और एक बेटा है। ईंट बनाकर जीवन-यापन करने वाले बैजनाथ चक्रधारी की छोटी बेटी युमना ने नीट में 720 में से 516 अंक लेकर आल इंडिया रैंक 93,683 व कैटेगिरी(ओबीसी) रैंक 42864 हासिल की। उनसे गांव की अन्य बेटियाें को भी सीखने मिलेगा।यमुना और युक्ति ने बताया कि उसके माता-पिता ईंट बनाने का काम करते हैं। यह काम परिवार के सभी सदस्य मिलकर करते हैं। इस काम में तीनों बहन और भाई अपने माता-पिता का सहयोग करते हैं। उनके साथ मिलकर ईंट बनाते हैं। कभी-कभी इस काम में समय भी अधिक देना पड़ता है। लेकिन काम के साथ-साथ पढ़ाई भी जरूरी है। यमुना की सफलता से गदगद पिता बैजनाथ चक्रधारी ने कहा कि परिवार के काम में उनकी बेटियां बहुत मदद करती है। बेटी आगे बढ़ेगी तो परिवार का नाम भी रोशन होगा। वहीं यमुना की मां कुसुम निरक्षर है। मां का कहना है कि बेटियां खुद अपनी मंजिल को तय कर रही हैं इससे बड़ी खुशी उसके लिए कुछ और नहीं है।