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बेंगलुरु :- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने सोमवार को कहा कि सेंट्रल बैंक लगातार ऐसी पॉलिसी, सिस्टम और प्लेटफॉर्म तैयार करने पर काम कर रहा है जो फाइनेंशियल सेक्टर को मजबूत, जुझारू और कस्टमर फोकस बनाएंगे. ऐसे में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग में ग्राहकों को और ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी, साथ ही मजबूत डिजिटल सिस्टम से साइबर फ्रॉड के मामलों पर भी लगाम लगेगी. आरबीआई@90 पहल के तहत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर आयोजित ग्लोबल सम्मेलन में गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और उभरती टेक्नोलॉजी दुनिया में लगभग सभी अर्थव्यवस्थाओं की भविष्य की यात्रा को आकार देंगी.
DPI व्यापक रूप से पब्लिक सेक्टर में निर्मित बेसिक टेक्नोलॉजी सिस्टम है जो यूजर्स और अन्य डेवलपर के लिए खुले तौर पर उपलब्ध हैं. गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि पिछले दशक में पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली में अभूतपूर्व प्रौद्योगिक बदलाव हुआ है. इन सभी संकेतों से पता चलता है कि आने वाले वर्षों में यह प्रक्रिया और भी तेज हो सकती है.
भारत में तेजी से बढ़ा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चरडीपीआई को लेकर देश के अनुभव पर उन्होंने कहा, ‘‘ डीपीआई ने भारत को एक दशक से भी कम समय में वित्तीय समावेश के ऐसे स्तर को हासिल करने में सक्षम बनाया है, जिसे हासिल करने में अन्यथा कई दशक या उससे भी अधिक समय लग जाता.’’दास ने पिछले वर्ष शुरुआती स्तर पर पेश किए गए एक प्रौद्योगिकी मंच का जिक्र करते हुए कहा कि आरबीआई ने इसका नाम ‘यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस’ (ULI) रखने का प्रस्ताव किया है. यह झंझट मुक्त लोन को सक्षम बनाता है. उन्होंने कहा कि यूएलआई मंच विभिन्न डेटा सेवा प्रदाताओं से ऋणदाताओं तक विभिन्न राज्यों के भूमि रिकॉर्ड सहित डिजिटल जानकारी के निर्बाध प्रवाह की सुविधा प्रदान करता है.
क्या है सरकार की नई पेंशन स्कीमक्या है सरकार की नई पेंशन स्कीमआगे देखें…गवर्नर दास ने कहा, ‘‘ ..शुरुआती चरण से प्राप्त अनुभव के आधार पर यूएलआई को राष्ट्रव्यापी स्तर पर जल्द ही पेश किया जाएगा.’’ उन्होंने कहा कि यूपीआई प्रणाली में सीमा पार धन प्रेषण के उपलब्ध माध्यमों के लिए एक सस्ता और त्वरित विकल्प बनने की क्षमता है. गवर्नर ने इस बात पर भी जोर दिया कि वित्तीय संस्थाओं को कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े जोखिमों के प्रति पूरी तरह सचेत रहना चाहिए.
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