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भगवान श्री राम के अयोध्या आगमन की तैयारी जोरों शोरों से चल रही है। प्रभु के बाल स्वरूप की झलक सामने आ चुकी है। सोमवार के दिन 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया पूरी होगी। वहीं, शुक्रवार से अचल विग्रह यानी मूर्ति देह के शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रक्रिया में मंत्रों द्वारा मूर्ति में प्राण डाला जाएगा। शुभ मुहूर्त में 9:00 बजे शुक्रवार को अरणि मंथन से कार्यक्रम शुरू किया गया। आइए जानते हैं प्राण-प्रतिष्ठा प्रक्रिया से जुड़ी रोचक जानकारियां-
अरणि मंथन प्रक्रिया क्या है?
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के अपने नियम हैं। भगवान श्री गणेश की पूजा करने के पाश्चत्य अरणि मंथन की प्रक्रिया शुरू की गयी। इस प्रक्रिया में अग्नि मंत्र का उच्चारण करते हुए अग्नि प्रकट की जाती है। वैदिक परंपरा अनुसार, 9 कुंड में अरणि मंथन द्वारा अग्नि प्रकट की गई, जो 22 तारीख तक प्रज्वलित रहेगी। इसी अग्नि में हवन कर नवग्रहों की पूजा की गयी। नौ ग्रहों की पूजा कर उनका आवाहन किया गया। इसके बाद राम मंदिर की वास्तु पूजा के साथ योगिनी पूजा और क्षेत्रपाल पूजा भी की गयी।
आज से शुरू होंगे अधिवास
भगवान श्री राम की आंखों को पीले वस्त्र से ढका गया है, जिसे 22 तारीख को ही खोला जाएगा। आज शनिवार यानी 20 जनवरी से हवन पूजन के साथ भगवान श्री राम के पांच अधिवास शुरू हो जाएंगे। प्रभु को फल, पुष्प, प्रसाद, शक्कर और पिंड में रखा जाएगा। 20 जनवरी को कमल के फूलों से नए विग्रह का अधिवास होगा। 81 कलशों के जल से मंदिर का शुद्धिकरण भी किया जाएगा। 22 जनवरी के दिन प्रभु अपने आसन पर विराजमान हो जाएंगे।