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गरियाबंद। उदंती अभ्यारण्य में टांगरान के जंगल में अवैध कब्जा कर बसे 30 परिवार को बेदखल किया गया है. कब्ज़ा करने वालों में 23 लोग ओडिसा के नवरंगपुर के रहने वाले है. अतिक्रमण में लीड करने वाले 13 आरोपियों को हिरासत में भी लिया गया है, जिन्हें कल न्यायालय में पेश किया जाएगा. वन विभाग की इस कार्रवाई के दौरान 4 वन मंडल से 40 महिला वन रक्षक और वन प्रबंधन समिति की महिला सदस्य समेत 250 स्टाफ दिन भर डटे रहे. बताया जा रहा है कि इन अतिक्रमणकारियों ने जंगल में 70 हेक्टेयर जमीन पर पेड़ो को काटकर उसपर कब्ज़ा कर लिया था.
जानकरी के मुताबिक, उप निदेशक द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान लगातार चलाया जा रहा है. जिसके तहत अब तक 600 हेक्टेयर से भी ज्यादा वन भूमि से 250 से ज्यादा लोगो को खदेड़कर खाली कराए गई वन भूमि पर वानिकी का काम कराया गया है. कार्यवाही के दौरान अतिक्रमणकारी पूर्व में महिलाओ को आगे कर कार्यवाही से बचने का प्रयास करते थे. लेकिन इस बार ऐसा न हो इसके लिए वन अमला पूरी तैयारी से कब्ज़ा खाली कराने पहुंचा था. इस बार अभ्यारण्य प्रशासन महासमुंद, कांकेर, केशकाल और धमतरी वन मंडल की 40 महिला वन रक्षक और वन प्रबंधन समिति की महिला सदस्य को भी अपने साथ कब्ज़ा हटाने ले गया. महासमुंद की महिला कर्मी अपने 8 माह के दूध मूहे बच्चे के साथ इस अभियान की सहभागी बन साहस का परिचय दिया, जिसकी सभी ने सराहना की.
अतिक्रमणकारियों को सौंपा उनका घरेलु सामान :-
अतिक्रमण हटाने के दौरान अतिक्रमणकारियों का समस्त घरेलु सामान (सोलर पैनल, टीन शेड, बर्तन, पॉलीथिन, आदि) सम्बंधित पटवारी के समक्ष उन्हीं को सुपुर्द कर दी गयी और वनोपज की जब्ती की गयी. शुरुआत में अतिक्रमणकारी उग्र हुए लेकिन विभाग द्वारा समझाइश देने पर शांत हुए. पूरी कार्रवाई संवेदनशील और शान्तिपूर्ण तरीके से हुई. वहीं इस कार्रवाई के दौरान वन अमले ने देवगुड़ी और अन्य धार्मिक संरचनाओं को सुरक्षित रखा है.
न्यायालय ने उचित कार्यवाही के दिए थे निर्देश :-
बता दें कि, इससे पहले अतिक्रमणकारियों को वन विभाग ने 2 बार कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसके विरुद्ध उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में 2 बार याचिका लगाई थी. जिसमे कोर्ट ने वन विभाग की कार्रवाई को सही बताया और नियम अनुसार कार्यवाही करने निर्देशित किया था.
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जुलाई में हाईकोर्ट के फैसले के बाद अगस्त 2023 में अतिक्रमणकारियों ने उप सचिव (वन विभाग) के समक्ष बेदखली आदेश के विरुद्ध अपील की थी. जिस पर उप सचिव ने 2 बार सुनवाई करने के बाद वन विभाग द्वारा दिये गए ISRO इमेजरी के साक्ष्य को सही मानते हुए उनके कब्जे में बने रहने की अपील 13 दिसंबर 2023 को ख़ारिज कर दी थी.