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हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस का पर्व हर साल कार्तिक मास की त्रयोदशी को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में त्रयोदशी के दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत भी रखा जाता है। धनतेरस को धन त्रयोदशी के नाम से भी जानते हैं। धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होता है और करीब 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी व अन्य वस्तुओं को खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है।
स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन: धनतेरस पूजा के लिए सबसे उत्तम समय प्रदोष काल माना गया है, जब स्थिर लग्न होता है। मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान धनतेरस पूजा की जाए तो मां लक्ष्मी घर में ठहर जाती है। वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दिवाली के त्योहार के दौरान ज्यादातर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है।
धनतेरस के दिन क्यों करते हैं दीपदान: धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरी की जयंती मनाई जाती है। इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है।
धनतेरस 2023 कब है: इस साल धनतेरस 10 नवंबर 2023, शुक्रवार को है। त्रयोदशी तिथि प्रारंभ नवम्बर 10, 2023 को 12:35 पी एम बजे से होगी और त्रयोदशी तिथि समाप्त नवंबर 11, 2023 को 01:57 पी एम बजे तक रहेगी।
प्रदोष काल – 05:29 पी एम से 08:07 पी एम
वृषभ काल – 05:46 पी एम से 07:42 पी एम
धनतेरस के दिन खरीदारी, दीपदान व पूजन का शुभ मुहूर्त: धनतेरस का दिन खरीदारी, दीपदान व पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट है।